ॐ
आध्यात्मिक मार्गदर्शक
मुनि श्री जी
गुणायतन के आध्यात्मिक प्रेरणास्रोत एवं जैन दर्शन के प्रकाशस्तम्भ
मु
मुनि श्री जी
जैन आचार्य एवं दार्शनिक
जीवन परिचय
मुनि श्री जी का जन्म एक धर्मपरायण जैन परिवार में हुआ। बाल्यकाल से ही उनमें आध्यात्मिक जिज्ञासा थी। युवावस्था में उन्होंने संसार की नश्वरता को समझकर दीक्षा ग्रहण की।
उन्होंने जैन आगमों का गहन अध्ययन किया और तत्त्वज्ञान में पारंगत हुए। उनके प्रवचन सरल भाषा में जटिल दार्शनिक सत्यों को समझाते हैं।
गुणायतन की परिकल्पना उन्हीं की दृष्टि का मूर्त रूप है — जहाँ १४ गुणस्थानों की यात्रा को वास्तुकला के माध्यम से अनुभव किया जा सके।
मुख्य उपदेश
जीवन को आनंदमय बनाने के सूत्र
1
अहिंसा परमो धर्मः
2
सत्य ही ईश्वर है
3
अपरिग्रह — संग्रह का त्याग
4
अनेकान्तवाद — सत्य बहुआयामी है
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गुणायतन की परिकल्पना
"जब मैंने गुणायतन की कल्पना की, तो मेरे मन में एक ऐसे तीर्थ की छवि थी जहाँ आगंतुक केवल दर्शन नहीं करें, बल्कि स्वयं की आत्मा की यात्रा का अनुभव करें — पत्थर में, कला में, और ध्वनि में।"
— मुनि श्री जी